डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने का बेहतर साधन बन सकता है बिटकॉइन, बेहतर नियमन की जरूरत: पीएचडी उद्योग मंडल

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नोटबंदी के बाद देश में डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा दिये जाने के बीच देश के एक प्रमुख उद्योग मंडल ने कहा है कि क्रिप्टो करेंसी यानी बिटकॉइन पर नियामक को गौर करना चाहिये और बेहतर नियमन के साथ यह डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने का एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।

बिटकॉइन एक आभासी मुद्रा है। हाल के समय में वैश्विक वित्तीय लेन-देन और भुगतान के रूप में बिटकॉइन चर्चित हुआ है लेकिन क्रिप्टो करेंसी को नियमित करने के लिये कोई दिशानिर्देश न होने से यह काफी जोखिमपूर्ण मुद्रा बनी हुई है। फिलहाल बिटकॉइन वैध मुद्रा नहीं है।
पीएचडी वाणिज्य एवं उद्योग मंडल ने आज यहां बिटकॉइन पर उद्योग का नजरिया सामने रखते हुये एक रिपोर्ट जारी की और उद्योग संगठन के सदस्यों के बीच इस पर चर्चा की। उद्योग मंडल के अध्यक्ष गोपाल जीवराजका ने इस अवसर पर कहा, ‘‘एक उद्योग मंडल के नाते मुझे लगता है कि यह अवधारणा अथवा प्रौद्योगिकी (बिटकॉइन) उचित नियमन के साथ डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने का एक बेहतर साधन सृजित करने का अच्छा अवसर है।

नियामकीय एजेंसियों को इस पर गौर करना चाहिये और चर्चा होनी चाहिये।’’ उन्होंने कहा कि एक उद्योगजगत के मंच के नाते पीएचडी चैंबर ने इस मुद्दे पर अपने सदस्यों के बीच जागरुकता बढ़ाने का काम किया है। इसमें क्या सही है और क्या गलत है उन बिंदुओं को सामने रखा गया है। यदि इस प्रौद्योगिकी को उचित नियमन के साथ अमल में लाया जाता है तो यह डिजटल लेनदेन का सस्ता और बेहतर साधन बन सकती है।
जीवराजका ने हालांकि, यह स्पष्ट किया कि वह बिटक्वायन की वकालत नहीं कर रहे हैं बल्कि वह इसे एक विकल्प के तौर पर देख रहे हैं और चाहते हैं कि रिजर्व बैंक जैसी नियामकीय संस्थायें इस पर गौर करें। इसमें जो जोखिम हैं उनका समाधान होना चाहिये, इस पर बड़े पैमाने पर चर्चा कराई जा सकती है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में बिटकॉइन वैध मुद्रा नहीं है, सरकार इसे वैध मुद्रा के तौर पर स्वीकार नहीं करती है। उद्योग मंडल के मुताबिक हालांकि, रिजर्व बैंक ने इसे अवैध घोषित नहीं किया है। जारी

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