सभी रेस्टोरेंट्स पर लगेगा 5% जीएसटी, जानिए कितना सस्ता होगा बाहर खाना

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नई दिल्ली.गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) काउंसिल में लिए गए अहम फैसलों के बारे में फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने शुक्रवार को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 28% टैक्स ब्रैकेट में पहले 228 आइटम्स थे। इनमें से 178 आइटम्स पर टैक्स घटाकर उन्हें 18% के स्लैब में लाया गया है। इसके अलावा कई आइटम्स के टैक्स घटाए गए हैं। जेटली ने कहा- अब सभी तरह के रेस्टोरेंट्स पर 5% जीएसटी लगाया जाएगा। जेटली के मुताबिक इन नए रेट्स का फायदा 15 नवंबर से मिलना शुरू हो जाएगा। नरेंद्र मोदी ने इन बदलावों पर कहा कि इससे हमारे नागरिकों को भविष्य में फायदा होगा। बता दें कि काउंसिल की यह 23वीं बैठक थी।

जानिए किस तरह सस्ता होगा बाहर खाना खाना?

पहले कितना टैक्स लगता था?
– अरुण जेटली ने कहा, “देश में सभी एसी और नॉन एसी रेस्टोरेंट पर 5% जीएसटी लगाया जाएगा। पहले नॉन एसी रेस्टोरेंट में खाने के बिल पर 12% GST लगता था। इसके अलावा एसी रेस्टोरेंट में 18% जीएसटी लगता था।”
नॉन AC रेस्टोरेंट्स में खाना कितना सस्ता होगा?
अभी 15 नवंबर से
खाने का बिल 1000 खाने का बिल 1000
SGST@6% 60 SGST@2.5% 25
CGST@6% 60 CGST@2.5% 25
TOTAL 1120 TOTAL 1050
आपकी बचत=70 रुपए
AC रेस्टोरेंट्स में खाना कितना सस्ता होगा?
अभी 15 नवंबर से
खाने का बिल 1000 खाने का बिल 1000
SGST@9% 90 SGST@2.5% 25
CGST@9% 90 CGST@2.5% 25
TOTAL 1180 TOTAL 1050
आपकी बचत= 130 रुपए
होटलों के चार्ज पर कितना फर्क पड़ेगा?
– स्टार्ड होटल के रेस्टोरेंट जो हर दिन एक रूम का 7500 रुपए या उससे ज्यादा चार्ज करते हैं, उन पर 18% GST लगेगा और इन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का फायदा भी मिलेगा। लेकिन, वो रेस्टोरेंट जो 7,500 से कम चार्ज करते हैं, उन पर 5% जीएसटी लगाया जाएगा और उन्हें ITC का फायदा नहीं मिलेगा।
जीएसटी की टैक्स स्लैब में किस तरह हुआ बदलाव
– जेटली ने बताया, ” 28% टैक्स कैटेगिरी में से 178 आइटम्स को 18% टैक्स स्लैब में लाया गया। 13 आइटम्स को 18% से 12% के टैक्स स्लैब में लाया गया। 6 आइटम्स को 18% से 5% के टैक्स स्लैब मेें लाया गया, 8 आइटम्स को 12% से 5% के टैक्स स्लैब लाया गया। इसके अलावा 6 आइटम्स को 5% से 0 की कैटेगरी में लाया गया है।”
28% से 18% के स्लैब में कौन से आइटम्स आए?
– च्यूइंगगम, चॉकलेट, कॉफी, कस्टर्ड पाउडर, मार्बल और ग्रेनाइट, डेंटल हाईजीन प्रोडक्ट, पॉलिश और क्रीम, सैनेटरी वेयर्स, लेदर क्लोदिंग, आर्टिफीशियल फर, विंग्स, कुकर, स्टोव, आफ्टर शेव, डियोड्रेंट, डिटर्जेंट और वॉशिंग पाउडर, रेजर्स एंड ब्लेड्स, कटलरी, स्टोरेज वाटर हीटर, बैट्री, चश्मे, रिस्ट वॉच, मैट्रेस जैसे आइटम्स।
किन आइटम्स पर 28% टैक्स लगता रहेगा?
– पान मसाला, कोल्डड्रिंक्स और बेवरेज, सिगार और सिगरेट, तम्बाकू के प्रोडक्ट, सीमेंट, पेंट, परफ्यूम, एसी, डिश वॉशिंग मशीन, वॉशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर, वैक्यूम क्लीनर, कार, टू व्हीलर, एयरक्राफ्ट और याच जैसे आइटम्स।
बदलावों पर मोदी ने क्या कहा?
– नरेंद्र मोदी ने कहा, “जीएसटी काउंसिल ने जो रिकमंडेशन दी है, उससे हमारे नागरिकों को भविष्य में फायदा होगा और ये GST को भी मजबूत करेंगी। GST से जुड़े लोगों से लगातार मिल रहे फीडबैक के आधार पर ये रिकमंडेशन दी गई हैं। जनभागीदारी हमारी कार्यशैली के केंद्र में है। हमारा हर फैसला पीपुल इन्स्पायर्ड, पीपुल फ्रैंडली और पीपुल सेंटरिक होता है। हम बिना थके GST के जरिए भारत की इकोनॉमी को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।’
जीएसटी काउंसिल क्या है?
– केंद्र और राज्‍यों के 17 से ज्‍यादा इनडायरेक्‍ट टैक्‍स के बदले में जुलाई से लागू किए गए गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स (GST) के रेट्स का लगातार रिव्यू हो रहा है। जीएसटी के चार स्लैब हैं- 5%, 12%, 18% और 28%। इनके रिव्यू के लिए जीएसटी काउंसिल बनाई गई है। इसमें केंद्र और राज्य, दोनों के रिप्रेजेंटेटिव्स शामिल हैं। इसमें जीएसटी के चलते कारोबारियों, कंज्यूमर्स और राज्यों को आ रही दिक्कतों पर चर्चा की जा रही है।
जीएसटी काउंसिल की मीटिंग क्यों हुई?
– काउंसिल की यह 23वीं मीटिंग गुवाहाटी में थी। इसमें फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली और 24 राज्यों के वित्त मंत्री और जीएसटी के प्रभारी मंत्रियों ने हिस्सा लिया। इसमें यह चर्चा की गई कि आम इस्तेमाल की चीजों पर क्या टैक्स रेट 28% से घटाकर 18% किया जा सकता है? बता दें कि 228 चीजें 28% के स्लैब में रखी गई थीं।
कांग्रेस ने क्या आरोप लगाया?
– पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल, कर्नाटक के कृषि मंत्री केबी गौड़ा और पुडुुचेरी के मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी ने एक दिन पहले कहा था, “पहले जब केंद्र से कहा गया कि ज्यादा जीएसटी रेट से आम लोगों और छोटे कारोबारियों पर बोझ बढ़ेगा, तो सरकार ने उनकी बातें नहीं सुनी। अब जब गुजरात के छोटे कारोबारी नाराज हैं तो सरकार इनके लिए टैक्स घटाने पर राजी हो गई।”
– उन्होंने आरोप लगाया कि जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों का टैक्स कलेक्शन कम हुआ है। सिर्फ 5 राज्यों ने रेवेन्यू का नुकसान नहीं होने की बात कही है। बाकी सभी ने मुआवजा मांगा है।

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