सुनाते हैं एक रहस्‍यमय ममी की कहानी जिसके नाखून और बाल आज भी बढ़ रहे हैं

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सच मानें या झूठ या कोई हैरान करने वाली बात पर हिमांचल के ग्‍यू गांव की ममी चमत्‍कार से कम नहीं है। इस जीवित ममी का सच क्‍या है कोई नहीं जानता।

जीवित ममी 

हिमांचल प्रदेश के स्पीति इलाके में समदो काजा सड़क पर एक गांव है ग्‍यू जहां पर एक मठ में एक लामा की ममी बैठी हुई मुद्रा में रखी है। अब आप कहंगे कि इसमें क्‍या खास बात है। तो जनाब खास बात है क्‍योंकि भले ही उसे ममी कहा जाता हो पर विशषेज्ञ इस बात पर राजी नहीं है,इसकी वजह हैं उसके बाल और नाख़ून जो आज भी बढ़ रहे हैं। तिब्बत सीमा से 2 किलोमीटर दूर भारत की ओर इस ध्यानमग्न संत की ममी लाहुल स्पीति में रखी है। कहते हैं कि यह ममी करीब 545 वर्ष पुरानी है इसके बावजूद ये रहस्‍य बना हुआ है कि इतने साल तक बिना किसी लेप के जमीन में दबी रहने के बावजूद ये इस अवस्था में कैसे बनी रह सकी है।

ममी की कहानी 

एक और हैरान करने वाली बात है कि अब तक दुनिया में जितनी भी ममी मिली हैं, वे लेटी हुई स्‍थिती में हैं, लेकिन ये बैठी हुई मुद्रा में है। इस ममी को देखने से लगता है कि जैसे कोई साधु या बौद्ध भिक्षु ध्‍यान की अवस्‍था में बैठा है। गांव वालों की मानें तो ये ममी पहले गांव में ही रखी हुई थी और एक स्तूप में स्थापित थी। जब 1974 में एक शक्तिशाली भूकम्प आया तो मलबे में दब गई। उसके बाद 1995 में ITBP के जवानों को सड़क निर्माण के दौरान खुदाई करते  हुए मिली। लोग तो ये भी कहते हैं कि खुदाई के दौरान इसके सिर पर कुदाल लग गई थी और खून भी निकला था, जिसके निशान आज भी देखे जा सकते हैं। 2009 तक ये ममी ITBP के कार्यालय में रखी रही। बाद में इसे गांव की धरोहर मानते हुए वहां के मठ में एक शीशे के केबिन में स्थापित कर दिया गया। अब इसकी देखभाल गांव में रहने वाले परिवार बारी-बारी से करते हैं।

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